निश्चय ही क्रिकेट अनिश्चितता का खेल है, जिसमे खिलाड़ी अपनी प्रतिभा, योग्यता जुझारूपन, आत्मविश्वास आदि से हार और जीत सुनिश्चित करते है ! पर डामिनिका में जिस तरह का प्रदर्शन भारतीय टीम ने किया उससे क्रिकेट की यह धारणा ही बदलती दिख रही है ! टेस्ट के पाचवे दिन वेस्ट इंडीज की पारी जब ख़तम हुई, तो टीम इंडिया को जीत के liye 47 ओवर में 180 रन बनाने थे, पर जब भारतीय टीम मैदान में बल्लेबाजी करने उतरी, तो दसेक ओवर में ही यह साफ़ हो गया की इस मैच का अंत क्या होगा !वेस्ट इंडीज के खिलाफ टेस्ट सिरीज १-० से जितने पर भले ही टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अपनी पीठ थप थापा रहे हो, पर डामिका टेस्ट ड्रा खेलकर जिस तरह वह एक एतिहासिक जीत से चुक गये, उसे पचाना आसान नही है ! एक तो मैच में चन्द्रपाल और एडवर्ड्स का कैच छोड़कर उन्हें जमने दिया गया और जब खुद बल्लेबाजी के अवसर आए, तो बेहद धीमी बल्लेबाजी कर संभावित जीत को एक नीरस ड्रा में बदल दिया गया ! कोच डंकन फ्लेचर का यह कहना सही हो सकता है की जिस पिच पर ओवर में तीन-चार रन बनाने मुस्किल थे वह पांच-छह रन प्रति ओवर बनाने की सोचना मिथ्या ख्वाब है पर aaj जिस तरह ट्वंटी-२० के आने से खिलाड़ी आक्रामक हुए है, उसमे पांच-छह रन प्रति ओवर बनाना मुस्किल भी नही ! बस जरुरत होती है, सही रणनीति और आत्मविश्वास की ! दुर्भाग्यवस इन दोनों की कमी खली टीम इंडिया को ! असल में धोनी ब्रिगेड तीन टेस्टों में एक जीत के बाद ही निश्चिंत से हो गया थे और ऐसा कोई खतरा लेना नही चाहते थे, जिससे टेस्ट क्रिकेट की रैंकिंग में उलटफेर की आशंका बने ! लिहाजा 'सेफ गेम' खेलने को तवज्जो दी गयी !
अब टीम इंग्लैंड के दौरे पर है, जहाँ मौसम डंडा है और पिच का मिजाज हमारे प्रतिकूल ! अगर वेस्ट इंडीज जैसे जज्बे से टीम इंडिया पार नही प् सकी, तो वहां उसकी राह तो और भी आसान नही ! हालांकि जिस तरह भारतीय टीम ने हाल के दिनों में बेहतरीन टीमो को घर में घुसकर मात दी है, उससे उम्मीद येही है की टीम इंडिया इंग्लैंड में भी जीत का डंका बजाएगी ! पर इसके लिए उसे अपने जज्बे और रणनीति को कसना होगा !



