Wednesday, 13 July 2011

चैम्पियन टीम ने नाक कटाई

निश्चय ही क्रिकेट अनिश्चितता का खेल है, जिसमे खिलाड़ी अपनी प्रतिभा, योग्यता जुझारूपन, आत्मविश्वास आदि से हार और जीत सुनिश्चित करते है ! पर डामिनिका में जिस तरह का प्रदर्शन भारतीय टीम ने किया उससे क्रिकेट की यह धारणा ही बदलती दिख रही है ! टेस्ट के पाचवे दिन वेस्ट इंडीज  की पारी जब ख़तम हुई, तो टीम इंडिया को जीत के liye 47 ओवर में 180 रन बनाने थे, पर जब भारतीय टीम मैदान में बल्लेबाजी करने उतरी, तो दसेक ओवर में ही यह साफ़ हो गया की इस मैच का अंत क्या होगा !वेस्ट इंडीज के खिलाफ टेस्ट सिरीज १-० से जितने पर भले ही टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अपनी पीठ थप थापा रहे हो, पर डामिका टेस्ट ड्रा खेलकर जिस तरह वह एक एतिहासिक जीत से  चुक गये, उसे पचाना आसान नही है ! एक तो मैच में चन्द्रपाल और एडवर्ड्स का कैच छोड़कर उन्हें जमने दिया गया और जब खुद बल्लेबाजी के अवसर आए, तो बेहद धीमी बल्लेबाजी कर संभावित जीत को एक नीरस ड्रा में बदल दिया गया ! 
कोच डंकन फ्लेचर का यह कहना सही  हो सकता है की जिस पिच पर ओवर में तीन-चार रन बनाने मुस्किल थे वह पांच-छह रन प्रति ओवर बनाने की सोचना मिथ्या ख्वाब है पर aaj जिस तरह ट्वंटी-२० के आने से खिलाड़ी आक्रामक हुए है, उसमे पांच-छह रन प्रति ओवर बनाना मुस्किल भी नही ! बस जरुरत होती है, सही रणनीति और आत्मविश्वास की ! दुर्भाग्यवस इन दोनों की कमी खली टीम इंडिया को ! असल में धोनी ब्रिगेड तीन टेस्टों में एक जीत के बाद ही निश्चिंत से हो गया थे और ऐसा कोई खतरा लेना नही चाहते थे, जिससे टेस्ट क्रिकेट की रैंकिंग में उलटफेर की आशंका बने ! लिहाजा 'सेफ गेम' खेलने को तवज्जो दी गयी ! 
अब टीम इंग्लैंड के दौरे पर है, जहाँ मौसम डंडा है और पिच का मिजाज हमारे प्रतिकूल ! अगर वेस्ट इंडीज जैसे जज्बे से टीम इंडिया पार नही प् सकी, तो वहां उसकी राह तो और भी आसान नही ! हालांकि जिस तरह भारतीय टीम ने हाल के दिनों में बेहतरीन टीमो को घर में घुसकर मात दी है, उससे उम्मीद येही है की टीम इंडिया इंग्लैंड में भी जीत का डंका बजाएगी ! पर इसके लिए उसे अपने जज्बे और रणनीति को कसना होगा !

Wednesday, 6 July 2011

कहाँ गयी इनकी नैतिक शिक्षा

स्कूल में एक विषय पढाया जाता है "Moral Science" यानी नैतिक शिक्षा ! इसमें यह सिखाया जाता है की झूट न बोले, लड़ाई झगडा न करे, अपशब्दों का प्रयोग न करे, बड़ो से तमीज से बात करे, छोटो को प्यार दे और अगर कोई आपको बुरा कहता है, तब भी खामोस रहकर अपनी गरिमा बनाये रखे ! इश विषय में नंबर लाना भी आसान होता है क्यूंकि अमूमन ये बाते बच्चे घर में ही सीख लेते है ! पर ज्योही  हम समझदारी की दलदल में फसते है नैतिक शिक्षा हमारे लिए बेमानी हो जाती है ! आज राजनेता इस कम में सबसे आगे दिख रहे है !
बड़े-बड़े मंचो पर बोलने वाले छोटी-छोटी पार्टिया हो या फिर छोटे छोटे मिके पर चिल्लाने बड़े नेता, अध्यक्ष हो या कार्यकर्ता, ऐसा लगता है की सभी नैतिक शिक्षा में बुरी तरह पिछडे हुए है ! कहते है, एक बच्चा बड़ा होकर क्या बनेगा, यह उसकी बचपन की गतिविधियों से ही पता चल जाता है ! येही वजह है की जितने भी आदर्श पुरुष हुए है, उनमे कुछ ख़ास तरह की समानताये देखि जाती है, मसलन वे पहले सुबह उठ जाते है, रात को लंप पोस्ट के नीचे बैठ कर पढ़ते है मिलो तक पढाई के लिए पैदल चलते थे आदि या फिर  इसके बिलकुल उलट वे दिन रात में फर्क नही करते थे, मनमौजी थे, घुमक्कड़ थे आदि !यानी हर महँ इंसान मौलिक रूप  से एक sa होता है  ऐसे में यह कहने में गुरेज़ नही की राजनेताओ की फ़िल्मी  जैसी हंसी, गुन्नी मुस्कान और निकला हुआ पेट उनके एक ऐसे बचपन और ऐसी जीवनचर्या दर्शाती है ! इन नेताओ की विचारधारा कैसी है, स्कूल की पढाई किस तरह हुई और नैतिक शिक्षा में वे कितने निपुड है, इसकी गवाह उनके दिए गये बयान है ! उनकी जुबान और उनके बयान कभी-कभी इतने स्तरहीन होते है की किसी सी-ग्रेड हिंदी फिल्म का स्क्रिप्टराइटर भी शर्मसार हो जाये !
 

Tuesday, 5 July 2011

पानी बचाओ

हमारी धरती पर ७५ फीसदी पानी है लेकिन पीने का पानी महज २.५ फीसदी और यह भी धीरे धीरे सुख रहा है ! ग्लोबल एनवयरमेंट आउट लुक की रिपोर्ट के मुताबिक २०३२ तक दुनिया की आधी आबादी जल संकट की चपेट में आ जाएगी ! साल दर साल भू जल का स्टार घाट रहा है ! विश्व बैंक की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक अपने देश में हर साल २३० क्यूबिक किलोलीटर भू जल का इस्तेमाल होता है जो सभी देशो से ज्यादा है ! कुदरत के इस अमूल्य संसाधन के लगातार दोहन और आबादी के बड़ते दबाव ने इसकी उपलब्धता को लोगो की पहुच से दूर कर दिया है आलम यह है की देश का एक तिहाई से ज्यादा हिस्सा जल संकट की चपेट में है ! भूजल के बड़ते इस्तेमाल को रोकने के लिए कोई कारगर क़ानूनी व्यवस्था नही होने से दिन प्रतिदिन इसका संकट बढता जा रहा है 

Sunday, 3 July 2011

इनको भी जरुरत है नैतिक शिक्षा की

हाल ही में बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कांग्रेस को लादेन की औलाद कहा और साथ ही साथ यह भी कहा की सरकार मुन्नी से भी ज्यादा बदनाम हो गयी ! इतना ही नही, उन्होंने रामलीला मैदान में सरकार की शह पर हुई पुलिसिया कार्रवाई को रावनलीला की संज्ञा दे डाली ! मान गये गडकरी शहब को, उनके शब्दों में इतनी राचनशीलता है की कई कॉपी राइटरो  की छुट्टी हो जाये ! हालांकि यह कहानी अन्य दलों की भी है ! विपक्ष नेता सुषमा स्वराज के झुमने को नचनियो से जोड़ना येही दिखता है की कोई किसी से कम नही !
तमीज और तहज़ीब से दुश्मनी सिर्फ राष्ट्रीय पार्टियों की ही नही बल्कि क्षेत्रीय पार्टियों का भी है ! जेडीयू  अध्यक्ष शरद यादव ने कहा था की राहुल गांधी को गंगा में फेंक देना चाहिए वही लालू यादव ने राहुल गाँधी के सिने पर तब रोलर चलवा देने की बात कही थी जब वह केंद्र में कांग्रेस से यारी नही निभा रहे थे ! बीजेपी भी "भारत जलाओ पार्टी" बनी तो यूपीऐ को भी "उल्टा-पुल्टा अलाएंस" कहा गया ! वरुण गाँधी ने दो साल पहले पीलीभीत में क्या-क्या कहा वह तो सभी जानते है ! रामदेव भी, जो कभी कांग्रेस के लिए देश का गौरव थे, नज़र बदलते ही ठग  बन गये ! कहा जाता है की कमान से निकला तीर और जबान से निकली बात कभी वापस नही आती, पर हमारे राजनेता इतने माहिर है की जबान से निकली बात को भी पलट देने का माददा रखते है
बहरहाल हैरानी यह नही की हमारे राजनेता नैतिक शिक्षा  में गोल है, बल्कि विडम्बना यह है की वे हमारा प्रतिनिधित्व करते है ! आखिर हम कब इस राजनीतिक जकडन से मुक्त हो पाएंगे ? 

Thursday, 23 June 2011

भूलूँ या याद करू

हर शिष्य की अभिलाषा होती है अपनी मंजिल को पाना और अपनी मंजिल को पाने के लिए न जाने कितने मोड़ों से गुजरना पड़ता है ! उन मोड़ों पर गुरु मार्गदर्शक बनकर सही राह व वक़्त के साथ आगे बढ़ना सिखाते है ! वक़्त गुजर जाता है और वे गुरु उन शिष्यों को भूल जाते है पर वह शिष्य हमेशा सोचता रहता है की उनको भूलों या याद करूँ क्योंकि उन्हें भूलना उन पलों का अपमान होगा है जो उनके साथ गुजारे है और उन्हें याद रखना उन पालूँ का अपमान होगा जो उनके बिना गुजारेंगे !

Wednesday, 15 June 2011

स्वास्थ का भी रखो ध्यान


एक कहावत है "काया राखे धरम और पूंजी रखे व्योहार" इसका अर्थ है की यदि शारीर स्वस्थ  और सशक्त  होगा तो सभी कर्तव्यो का पालन किया जा सकेगा और पास में पूंजी होगी तो व्योहार का पालन किया जा सकेगा! जैसे बिना पूंजी  के ठीक से व्यापार  नही किया जा सकता वैसे ही बिना स्वास्थ के हम जीवन भी ठीक से नही बिता सकते   और स्वास्थ ऐसी वास्तु नही जो हम किसी से उधार मांग ले या बाजार से खरीद ले! बाजार में दवाइयां मिलती है स्वास्थ कही नही मिलता! इसलिए हमें भगवान् द्वारा दिए गये इस शरीर का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए क्योंकि  यदि शारीर स्वास्थ रहेगा तो हम किसी भी चीज में आगे बड़ने की छमता रख सकते है

Sunday, 12 June 2011

आदर्श सोसाइटी

कुछ समय पूर्व वन अवम पर्यावरण मंत्रालय द्वारा निर्माण सम्बन्धी नियमो की अनदेखी के लिए आदर्श सोसाइटी इमारत को पूरी तरह गिराने के निर्देश जारी किये गए थे ! साथ ही यह भी बताया गया था की मंत्रालय के समक्ष चार विकल्प थे - मालिको पर नियमो के उल्लंघन के लिए दंड लगाना , इमारत का सरकार द्वारा अधिग्रहण , अनुमति से ऊपर बने गयी मंजिलो का ध्वंस अथवा पूरी की पूरी इमारत ढहा देना ! इनमे से उसे अंतिम विकल्प ही उचित लगा ! क्या इमारत ढहा देने से नुक्सान की भरपाई हो सकेगी ? मंत्रालय के इस निर्णय से सहमत हुआ जा सकता है ? शायद नही, तो फिर ऐसे आदेश का क्या औचित्य था ?

Thursday, 9 June 2011

कांग्रेस की छवि

जिश तरह से आज कांग्रेस ने अपनी छवि जनता के सामने बना रखी है उससे तो येही लगता है की भारत देश के नागरिको का अगर कोई सबसे बड़ा दुसमन है तो वो कांग्रेस सरकार है, जहा किसी को बोलने की या अपना हक मांगने की आजादी नही है अगर यही हाल बना रहा तो वो दिन दूर नही जब भारत में दूसरी आजादी की लड़ाई लड़ी जाएगी और इस बार लड़ाई अंग्रेजो से नही बल्कि अपनी ही सरकार कांग्रेस सरकार से लड़ी जाएगी जिसको खुद जनता ने कुर्सी पर बैठाया था की वो उनके दुखो और तकलीफों को कम कर सके!  

किसे कहे हम अपनी सरकार

यदि  हम गौर करे तो इस आजाद भारत में भी वही हो रहा है जो अंग्रेजो के ज़माने में हुआ था! आज की स्तिथि ही कुछ ऐसी बन गयी है की अपनी सरकार खुद अपने नागरिको पर जुल्म करने से पीछे नही हट रही है इसका ताजा उदाहरण राम लीला मैदान रहा है! यहा पे जो कुछ भी हुआ अगर हम उसकी तुलना जलियावाला बाग़ कांड से करे तो गलत नही होगा! वो तो अंग्रेज थे जो इस मुल्क के नही थे तो उन्होंने गोलिया बरसाई पर राम लीला मैदान पर तो अपनी सरकार ने ही अपने लोगो पर लाठिय बरसाई जो की अंग्रेजो दूर हम पर गोलिया बरसाए जाने के बराबर है! जब हमारी सरकार ही हम पर जुल्म करेगी तो इस देश के भविष्य का क्या होगा! 

Saturday, 28 May 2011

न्यूज़ चैनल बना बगवान

यह अक्सर देखा जाता रहा है की टी. वी. न्यूज़ चैनलों  में दुनिया खत्म होने की बात कही जाती रही है पर आज तक यह बात सच न हो सकी ! टी. वी. चैनल वाले तो महाप्रलय आने की तारीख तक तय कर देते है ! यह सब बाते करके इनको क्या मिलता है जबकि ये सब बाते हमेशा झूठ ही निकलती है ऐसे में ये सब बाते करके क्या ये अपनी विश्वशनीयता नही खो रहे है ! इन टी वी चैनल वालो को सायद अभी इस बात से कोई वास्ता नही है की इनकी ये सब हरकते  जनता पर क्या प्रभाव  डाल सकती है ! ये टी. वी. चैनल वाले ये सब दिखा कर क्या साबित करना चाहते है की वह भगवान् है.......

Tuesday, 10 May 2011

युवाओं में बढती हिंसा

कुछ दिन पुर्व एक अमेरिकी सर्वे के मुताबिक अमेरिका सहित दुनिया के तमाम देशे में युवाओं में हिंसा की खतरनाक प्रवृत्ति बदती जा रही है ! इस सर्वे में कुछ आंकड़े भी दिए गए  है और इस प्रवित्ति के कारन भी बताये  गये  है ! जो कारन अमेरिकी युवाओं में बताये गये थे वे कोई  ऐसे  कारन नही थे जिस पर गंभीरता से विचार करके  रोक न लगाई जा सके लिहाजा तब अमेरिकी संसद में भी इस गंभीर चिंता व्यक्त की गयी थी ! सर्वे के अनुसार अमेरिका में इतने बड़े पैमाने पर युवाओं को हिंसक होते पहले नही देखा गया था ख़ास कर कालेग  और स्कूल के के युवाओं को ! सर्वेषण में यह खुलासा भी किया गया है की छोटी छोटी बातों पर युवा बिना विचार किये अपने साथी की हत्या तक करने में गुरेज नही करते ! इसी तरह ऑस्ट्रेलिया इराक अफ्रीका इंडिया और भी सारे देशो के युवाओं में हिंसा की जबरदस्त वृद्धि हुई है ! अब इसके पीछे कौन जिम्मेदार है इसके बारे में कोई कुछ भी साफ़ साफ़ नही कह सकता पर इनको रोकने के क्या उपाय किये गये है ये भी कुछ पता नही !

Tuesday, 3 May 2011

हम भी किसी से कम नही

दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को आज मार गरिया गया. आतंक का दूसरा नाम कहे जाने वाले ओसामा को आखिर कार अमेरिका ने मार ही दिया भले चाहे अमेरिका को ओसामा को मरने में दस साल लगे हो लेकिन अमेरिका ने हार नही मानी और अंत में उशने ओसामा को मार ही दिया. ये था अमेरिका का जस्बा और उनका बदला आतंकवाद से.
भारत में भी आतंकवादियों का बोल बाला है भारत में भी बहुत से आतंकवादियों ने अपना आतंक फैला रखखा है अब भारतीय सेना को भी ऐसा ही कोई कारनामा करना चाहिए जिससे पता चल सके की भारत भी अपने दुसमन आतंकवादियों से बदला लेना जनता है और यह भी बता दे की भारतीय सेना किसी से कम नही है 



Sunday, 24 April 2011

यह भी हमारी भाषा है



भारत में जितनी भी लोक भाषा है, उनमे भोजपुरी लगभग अकेली ऐसी भाषा है, जिसके बोलने वालो की संख्या अपेशाकृत सबसे अधिक है. यही कारण है की भोजपुरी छेत्रिया भाषा होकर भी अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय महत्वा रखती है. इसका मूल कारण यह है की  इसके बोलने वाले लोग पूरी दुनिया में छाए हुए है. यह बात अलग है की इतनी महत्वपूर्ण लोक भाषा को अब तक वह स्थान नही मिला सका , जो मिलना चाहिए था. इस भाषा के सम्बन्ध में खास बात यह है की इसमें गहरी लोक चेतना है. इसकी महत्ता इस बात से भी आंकी जा सकती है की इस भाषा के पहले कवी कबीर दास जी है.

Tuesday, 19 April 2011

जिम्मेदार कौन

मौसम में आ रहे इन बदलावों की जानकारी, प्रभाव और उससे निबटने को लेकर जो रिपोर्ट अभी तक आई है, उसे गंभीरता से लेने की जरुरत है. ग्लोबल वार्मिंग को लेकर हमारी जानकारिय तो काफी बढ़ी है, फिर भी अपेषित जागरूकता न तो शासकीय स्तर पर है और न ही आम लोगो में  चेतना आई है. विभिन्न देशों के शीर्ष राजनैतिक स्तर पर तो इसे लेकर हमेशा ही कहा जाता रहा है की हम इसमें सबसे ज्यदा जागरूक है. पर यह भी एक सच्चाई है की विकसित देश ही पर्यावरण को बिगड़ने के लिए और सब देशो से कई गुना ज्यदा जिम्मेदार है.

Sunday, 17 April 2011

अब तो जागो

बढता विकास ही मनुष्य को विनाश के गाकर पर ले आया है. इसकी आहट अभी से महसूस की जा रही है. वज्ञानिक कई वर्षो से इसका अनुमान लगा रहे थे की लगातार कटते जंगल और बड़ते मकानों की उचाई एक दिन ऐसे ही हालत लाएगी. लेकिन मनुष्य अपने स्वार्थ और कागजी विकाश के नाम पर प्रक्रति के साथ ही खेल खेल रहा था जिसका परिडाम प्रक्रति मनुष्य के साथ ही खेल कर पूरा कर रही है .

Saturday, 9 April 2011

ek raat

मै आप सब से एक कहानी शेयर करता हु वैसे ये मेरे दोस्त क साथ सच में हुआ था .
बात बहुत पहले की है, मेरा दोस्त(राहुल) अपने गाँव में गया बहुत दिनों के बाद कुछ नहीं तो करीब १० साल के बाद गया. वो अपने गाँव शाम ६ बजे करीब पंहुचा उसके घर वालो ने उसका अच्छे से स्वागत किया. रात को जब राहुल खाना खा क सोने के लिए चत पर गया. chat पर वह अकेले सो रहा था करीब रात १ बजे देखा की उसका १० साल पहेले का एक दोस्त(टिंकू) uske पास आया हुआ है, वो अपने १० साल पुराने दोस्त को देख कर बहुत खुस था. उसका दोस्त भी खुश था. दोनों ने बैठ कर अपनी पुराणी यादें taaza की. फिर कुछ देर बाद टिंकू ने बहार घुमने के लिए कहा, पहले तो राहुल को अजीब लगा की इतनी रात में कहा घुमने जायेंगे पर बाद में वो राजी हो गया और दोनों रात के १:३० बजे घर क बहार घुमने चल दिए. दोनों बात करते करते गाँव के एक नदी कइ किनारे पहुचे. टिंकू ने कहा की चलो नदी में नहाते है तो राहुल ने कहा पागल हो क्या इतनी रात में नदी में कोई नहाता है क्या पर इतने में टिंकू नदी में कूद गया राहुल ने ये देखा की उश्का दोस्त टिंकू नदी में कूद कर दोब्ने लगा राहुल ने जोर जोर से चिल्ला कर गाँव वालो को बुलाया और टिंकू के बारे में बताया और कहा वो इशी नदी में डूब गया. सारे गाँव वालो ने कहा ये कैसे हो सकता है टिंकू तो १ साल पहले ही ish नदी में डूब कर मर गया था इतना सुनते ही राहुल के होश उढ़ गए और वो १५ दिनों तक बीमार रहा uske बाद वो वापस सहर आ गया. 

Monday, 4 April 2011

World Cup Trophy

टीम इंडिया ने वर्ल्ड कप जीत कर ये बता दिया की इश खेल में ये टीम बेस्ट है. पर अभी हाल की जानकारी से पता चला है की टीम इंडिया को जो ट्राफी मिली है वो नकली है, ये बहुत शर्म की बात है की, ये टीम इंडिया के साथ बहुत बड़ी नाइंसाफी हुई है. इडिया के हर एक नागरिक को इसका विरोध करना चाहिए. टीम इंडिया ने तो वर्ल्ड कप पूरे इमानदारी से खेल कर जीता तो उसके साथ बैमानी क्यों?