हाल ही में बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कांग्रेस को लादेन की औलाद कहा और साथ ही साथ यह भी कहा की सरकार मुन्नी से भी ज्यादा बदनाम हो गयी ! इतना ही नही, उन्होंने रामलीला मैदान में सरकार की शह पर हुई पुलिसिया कार्रवाई को रावनलीला की संज्ञा दे डाली ! मान गये गडकरी शहब को, उनके शब्दों में इतनी राचनशीलता है की कई कॉपी राइटरो की छुट्टी हो जाये ! हालांकि यह कहानी अन्य दलों की भी है ! विपक्ष नेता सुषमा स्वराज के झुमने को नचनियो से जोड़ना येही दिखता है की कोई किसी से कम नही !तमीज और तहज़ीब से दुश्मनी सिर्फ राष्ट्रीय पार्टियों की ही नही बल्कि क्षेत्रीय पार्टियों का भी है ! जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव ने कहा था की राहुल गांधी को गंगा में फेंक देना चाहिए वही लालू यादव ने राहुल गाँधी के सिने पर तब रोलर चलवा देने की बात कही थी जब वह केंद्र में कांग्रेस से यारी नही निभा रहे थे ! बीजेपी भी "भारत जलाओ पार्टी" बनी तो यूपीऐ को भी "उल्टा-पुल्टा अलाएंस" कहा गया ! वरुण गाँधी ने दो साल पहले पीलीभीत में क्या-क्या कहा वह तो सभी जानते है ! रामदेव भी, जो कभी कांग्रेस के लिए देश का गौरव थे, नज़र बदलते ही ठग बन गये ! कहा जाता है की कमान से निकला तीर और जबान से निकली बात कभी वापस नही आती, पर हमारे राजनेता इतने माहिर है की जबान से निकली बात को भी पलट देने का माददा रखते है
बहरहाल हैरानी यह नही की हमारे राजनेता नैतिक शिक्षा में गोल है, बल्कि विडम्बना यह है की वे हमारा प्रतिनिधित्व करते है ! आखिर हम कब इस राजनीतिक जकडन से मुक्त हो पाएंगे ?
jab hum jagenge
ReplyDeleteISE KAHTE HAIN POLITICS OR SATTA KI LADAYI...YA KURSI KI LADAYI..OR SATTA KI LADAYI ME JAB APNA HI APNO KI GARDAN UDHANE KO TAIYAAR RAHTA HAI TO YE CHHUTTE-MUTTE TO ANYA DALO KE KAARY-KARTA HAIN..JIS THALI ME KHAYENGE USI KE NA GUD GAYENGE..OR DAL-BADALU LOG TO KISI BHI THALI KE SAGE NAHI HOTE..
ReplyDeleteEK BAAT OR HUMARA PRATI-NIDHITAV RAJNETA NAHI BALKI HUM KHUD APNA PRATI-NIDHITAV KARTE HAIN...INKA BAS CHALE TO YE JANTA KO BHI BECH KAR KHA JAYE.....