हर शिष्य की अभिलाषा होती है अपनी मंजिल को पाना और अपनी मंजिल को पाने के लिए न जाने कितने मोड़ों से गुजरना पड़ता है ! उन मोड़ों पर गुरु मार्गदर्शक बनकर सही राह व वक़्त के साथ आगे बढ़ना सिखाते है ! वक़्त गुजर जाता है और वे गुरु उन शिष्यों को भूल जाते है पर वह शिष्य हमेशा सोचता रहता है की उनको भूलों या याद करूँ क्योंकि उन्हें भूलना उन पलों का अपमान होगा है जो उनके साथ गुजारे है और उन्हें याद रखना उन पालूँ का अपमान होगा जो उनके बिना गुजारेंगे !Thursday, 23 June 2011
भूलूँ या याद करू
हर शिष्य की अभिलाषा होती है अपनी मंजिल को पाना और अपनी मंजिल को पाने के लिए न जाने कितने मोड़ों से गुजरना पड़ता है ! उन मोड़ों पर गुरु मार्गदर्शक बनकर सही राह व वक़्त के साथ आगे बढ़ना सिखाते है ! वक़्त गुजर जाता है और वे गुरु उन शिष्यों को भूल जाते है पर वह शिष्य हमेशा सोचता रहता है की उनको भूलों या याद करूँ क्योंकि उन्हें भूलना उन पलों का अपमान होगा है जो उनके साथ गुजारे है और उन्हें याद रखना उन पालूँ का अपमान होगा जो उनके बिना गुजारेंगे !Wednesday, 15 June 2011
स्वास्थ का भी रखो ध्यान
एक कहावत है "काया राखे धरम और पूंजी रखे व्योहार" इसका अर्थ है की यदि शारीर स्वस्थ और सशक्त होगा तो सभी कर्तव्यो का पालन किया जा सकेगा और पास में पूंजी होगी तो व्योहार का पालन किया जा सकेगा! जैसे बिना पूंजी के ठीक से व्यापार नही किया जा सकता वैसे ही बिना स्वास्थ के हम जीवन भी ठीक से नही बिता सकते और स्वास्थ ऐसी वास्तु नही जो हम किसी से उधार मांग ले या बाजार से खरीद ले! बाजार में दवाइयां मिलती है स्वास्थ कही नही मिलता! इसलिए हमें भगवान् द्वारा दिए गये इस शरीर का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए क्योंकि यदि शारीर स्वास्थ रहेगा तो हम किसी भी चीज में आगे बड़ने की छमता रख सकते है
Sunday, 12 June 2011
आदर्श सोसाइटी
कुछ समय पूर्व वन अवम पर्यावरण मंत्रालय द्वारा निर्माण सम्बन्धी नियमो की अनदेखी के लिए आदर्श सोसाइटी इमारत को पूरी तरह गिराने के निर्देश जारी किये गए थे ! साथ ही यह भी बताया गया था की मंत्रालय के समक्ष चार विकल्प थे - मालिको पर नियमो के उल्लंघन के लिए दंड लगाना , इमारत का सरकार द्वारा अधिग्रहण , अनुमति से ऊपर बने गयी मंजिलो का ध्वंस अथवा पूरी की पूरी इमारत ढहा देना ! इनमे से उसे अंतिम विकल्प ही उचित लगा ! क्या इमारत ढहा देने से नुक्सान की भरपाई हो सकेगी ? मंत्रालय के इस निर्णय से सहमत हुआ जा सकता है ? शायद नही, तो फिर ऐसे आदेश का क्या औचित्य था ? Thursday, 9 June 2011
कांग्रेस की छवि
जिश तरह से आज कांग्रेस ने अपनी छवि जनता के सामने बना रखी है उससे तो येही लगता है की भारत देश के नागरिको का अगर कोई सबसे बड़ा दुसमन है तो वो कांग्रेस सरकार है, जहा किसी को बोलने की या अपना हक मांगने की आजादी नही है अगर यही हाल बना रहा तो वो दिन दूर नही जब भारत में दूसरी आजादी की लड़ाई लड़ी जाएगी और इस बार लड़ाई अंग्रेजो से नही बल्कि अपनी ही सरकार कांग्रेस सरकार से लड़ी जाएगी जिसको खुद जनता ने कुर्सी पर बैठाया था की वो उनके दुखो और तकलीफों को कम कर सके! किसे कहे हम अपनी सरकार
यदि हम गौर करे तो इस आजाद भारत में भी वही हो रहा है जो अंग्रेजो के ज़माने में हुआ था! आज की स्तिथि ही कुछ ऐसी बन गयी है की अपनी सरकार खुद अपने नागरिको पर जुल्म करने से पीछे नही हट रही है इसका ताजा उदाहरण राम लीला मैदान रहा है! यहा पे जो कुछ भी हुआ अगर हम उसकी तुलना जलियावाला बाग़ कांड से करे तो गलत नही होगा! वो तो अंग्रेज थे जो इस मुल्क के नही थे तो उन्होंने गोलिया बरसाई पर राम लीला मैदान पर तो अपनी सरकार ने ही अपने लोगो पर लाठिय बरसाई जो की अंग्रेजो दूर हम पर गोलिया बरसाए जाने के बराबर है! जब हमारी सरकार ही हम पर जुल्म करेगी तो इस देश के भविष्य का क्या होगा!
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