Wednesday, 15 June 2011

स्वास्थ का भी रखो ध्यान


एक कहावत है "काया राखे धरम और पूंजी रखे व्योहार" इसका अर्थ है की यदि शारीर स्वस्थ  और सशक्त  होगा तो सभी कर्तव्यो का पालन किया जा सकेगा और पास में पूंजी होगी तो व्योहार का पालन किया जा सकेगा! जैसे बिना पूंजी  के ठीक से व्यापार  नही किया जा सकता वैसे ही बिना स्वास्थ के हम जीवन भी ठीक से नही बिता सकते   और स्वास्थ ऐसी वास्तु नही जो हम किसी से उधार मांग ले या बाजार से खरीद ले! बाजार में दवाइयां मिलती है स्वास्थ कही नही मिलता! इसलिए हमें भगवान् द्वारा दिए गये इस शरीर का अच्छे से ध्यान रखना चाहिए क्योंकि  यदि शारीर स्वास्थ रहेगा तो हम किसी भी चीज में आगे बड़ने की छमता रख सकते है

1 comment:

  1. SWASTH TO APNI JAGAH SAHI HAI...PAR KARTVY KA PALAN KARNE KE LIYE SHARIR KE ANDAR EKCHHA-SHAKTI KI JARURT HOTI HAI...OR RAHI BAAT BEHAVIOUR KI TO PUNJI HI JEEVAN ME SAB-KUCH NAHI HOTA HAI..KISI KE SATH ACHCHA WYAVAHAR RAKHNE KE PUNJI KE SATH-SATH AACHARAN KI BHI AAWSAKTA PADTI HAI...SAHI KAHA HAI KI AGAR SHARIR SWASTH RAHEGA TBHI HUM JEEVAN ME AAGE BAD PAYENGE...

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